Wednesday, January 15, 2014

जनता (झूंठा) दरबार 
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बन्दर राजा एक पेड़ से दूसरे दूसरे से तीसरे पेड़ पे कूदते कूदते जंगल में कहीं गायब हो गया
सभी शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतु जो उसको सुनने आये थे वेह बेहद निराश हो गए, उनको आशा थी कि वोह उनकी मासाहारी भक्षी जानवरों से सुरक्षा करेगा !
सियार जो कि बन्दर राज का सलाहकार था वेह पेड़ के पीछे खड़ा खड़ा हस्ता हुआ देखा गया था
इस तर्ज जंगल दरबार समाप्त हुआ
पेड़ के पीछे से कोई धृष्टता से हस्ता हुआ चला गया
सभी प्राणी,पक्षी एवं पशु निराश होकर शांतिपूर्वक वहाँ से चल दिए
उन सभी निरीह प्राणी को बहुत तेज़ झटका लगा जब "जंगल नाउ " समाचार चैनल पे बार बार उन्होंने देखा कि "बन्दर राज को वोट दो" का प्रचार किया जा रहा है और सभी समाचार बन्दर राजा के भाग जाने पे चुप्पी साढ़े हुए थे!

शेर अपनी गुफा में से दहाड़ा "मैंने कहा था न"

इसी बीच सीयर ने बन्दर राजा को खोज निकला और कहा हमारी पोल मत खोलेगा हम आपको बाहरी सुरक्षा प्रदान करेंगे .. ये सुनकर बन्दर राजा अपनी छुपी हुए "महलनुमा" कुटिया से बहार आके जोश भर के बहार आ गया और जंगल नाउ चैनल को उसने बयान दिया कि अगला जंगल दरबार का आयोजन बहुत ही अछे सलीके से किया जायेगा और वोह पेड़ों पे चढ़ के बांहग नहीं जायेगा

कुछ ही समय बाद बन्दर राज ने गुलाटी पलटी मरते हुए अपना बयान वापस ले लिया , और कहा कि अब कोई भी जंगल दरबार नहीं लगेगा , अब बन्दर सभी शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतुओं के घर जाया करेगा गुलाटी पलटी मारते हुए . सभी जंगली प्राणी मन में सोचने लगे इस बन्दर के हाथ में चाबी देकर हमसे भारी भूल हुई है !

सभी शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतु असमंजस में पड़ गए क्योंकि उन्होंने जंगल नाउ जैसे समाचार चैनल के कहने पे इस गुलाटी मार बन्दर राजा को चुनाव में जितवाया था
उनको कहा गया था कि बन्दर दूध का धुला हुआ है, हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि बन्दर प्रभु श्री राम का सैलानी था, वोह समुन्दर लांघ के भी जायेगा अगर समय बुरा हुआ तो
अब वेह निरीह शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतु को लग्न लगा कि कुटिल बाघिन का ही शाशन चल रहा है , गुलाटी मार बन्दर तो सिर्फ नाम मात्र राज कर रहा है असल फैंसला तो कुटिल बाघिन ही लेती है. बन्दर कि तो नियति ही पलटी मारना है , वोह एक जगह रुक हो नहीं सकता, न इंजीनियरिंग में टिका न शासकीए नौकरी पे टिका न ही अपने गुरु के आंदोलन पे रुका.
बन्दर बस समय के अनुसार अपनी आवाज़ बदल देता है , उसको आम शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतुओं के दुःख दर्द के बारे में कुछ नहीं मालूम जिन्होंने उसको जितवाया था.
और इस सब के उप्पर वोह कुटिल बाघिन और सियार से बहुत डरता है .
ये तो एक ऐसा बन्दर है जिसका हाथ नारियल में फस गया जब वोह उसमें रक्खी मूंगफली खा रहा था! और इसी प्रकार उस बन्दर को शिकारी ने फांस लिया.

(In africa there is a practice by which hunters make a big hole in the coconut and fill it with peanuts. smelling the peanuts monkey puts his hand in it and the hunter captures him never to be released)

शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतु अब अपने लकीर के भरोसे बैठे हैं,
जब तक सियार बन्दर कि रखवाली कर रहा है तब तक बन्दर अपनी शक्तिओं को त्याग नहीं सकता
और सियार ऐसा करेगा नहीं क्योंकि वोह शेर को जंगले का साम्राज्य नहीं देना चाहता
अब बन्दर राजा एक पेड़ से दूसरे पेड़ पे गुलाटी और पलटी मारता हुआ घूम रहा है , सभी शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतुओं कि समस्यें तहा कि तहा पड़ी हुई हैं , अब कोई जंगल दरबार उनको नहीं बचा सकता , सियार तो बहार छुपा हुआ मौज मस्ती कर रहा है . बेचारा शेर अब उन मूर्ख शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतु को नहीं बचा सकता
अब उस बन्दर के राज्ये के सभी शाकाहारी जानवर, भोले पक्षी एवम निरपराध जंतु अगले चुनाव कि राह देख रहे हैं , उंमो मालूम है कि शेर ही उनको सभी आपदाओं से मुक्ति दिलवा सकता है , शेर ही एक मात्र आशा है

उनको अब पछतावा हो रहा है कि उनसे बड़ी भूल हुई, कुटिल बाघिन का शाशन गुलाटी मार बन्दर से अछा था , कम से कम वोह पलटू तो नहीं थी.

No offence meant to any "Animal" or "bird."